आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

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आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

इस लम्हे की, और इसमें छिपे ब्रम्हाण्ड की

इस रहस्य की, और इसमें छिपे ज़ाहिर की

 

आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

इस आकार की, और इसमें छिपे निराकार की

इस हवा की, और इसमें आती उसकी ख़ुशबू की

 

आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

इस एक की, और इसमें छिपे अनेक की

इन गुणो की, और इनमें छिपे निर्गुण की

 

आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

इस नाद की, और इसमें छिपे अनाहद की

इस शोर  की, और इसमें छिपी ख़ामोशी की

 

आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

कुछ तेरी, कुछ मेरी, और तेरी मेरी से बनी इस दुनिया की

इस प्रकट की, और इसमें छिपे अप्रकट की

 

आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।

कुछ कही, कुछ अनकही

कुछ शब्दों की, और कुछ शब्दों से परे की

प्रेम की, प्रतीक्षा की, हसने की, गाने की

और कुछ मौन की

 

आ बैठ मेरे पास, कुछ बात करें ।


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Anthology

ख़ामोशी


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Poetry by ख़ामोशी

हर आवाज़ के पीछे एक ख़ामोशी छुप्पी खड़ी है तुम आवाज़ों को मत छोड़ना बस आवाज़ों की लहरों पर तैरना सीख लो यह आवाज़ें तुम्हे अपने आगोश मे लेकर फिर...
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Intervals

Poetry by Neha Kothari

My body is silent I feel it balancing tone And muting all conversation Of pain or fatigue Slowly the silence creeps into The space around me Where I catch it...
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रस्मो-रिवाज

Poetry by Omendra Ratnu

रस्मो-रिवाज वो निभाएं जिन्हें ग़रज़ हो दुनिया वालों से, ना रुसवाई का कोई डर था ना था खौफ पशेमान होने से , खुद को मिटाने की कसम पे चले हैं वफ़ा...
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