धड़कते दिलों की एक किताब

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धड़कते दिलों की एक किताब

धड़कते दिलों की एक किताब

पन्ने तो सफ़ेद थे पर स्याही लाल थी

शब्द अभी भी ज़िंदा थे उसमे

और उन शब्दों में छुप्पी कुछ यादें थीं

बातें तो पुरानी थीं पर अभी भी ज़िन्दा थीं

धड़क रहीं थीं, साफ़ थीं , जैसे बस अभी की ही हों

और उन यादों से कुछ खुश्बू  सी आ रही थी

थोड़ा टटोला तो पाया की खुश्बू  तो मोहब्बत की थी

यानी वो मोहब्बत तो आज भी ज़िंदा थी

राह देख रही थी,  कि कब मैं उसे छुऊं, सेहलाऊं और फिर से अपना बना लूँ

मग़र किसकी मोहब्बत की खुश्बू है ये

उनकी जो कहते हैं कि मुझसे मोहब्बत करते हैं

या मेरी ही खुद की

या उस रब की जिसने हम सब को मोहब्बत करना सिखाया

प्रशन गहरा था, मगर साफ़ था

गंगा की तरह पाक था

उथले पानी मे तो उत्तर नहीं थे इसके

ग़हरी छलांग की हिम्मत जुटानी थी

 

मणि तो सागर की गहराईयों में ही मिलती है

यूँ लहरों पे तो सिर्फ़ सफ़ेद झाग ही हाथ आती है

कुछ बेपरवाह निकले इस उत्तर की खोज मे

कूदे सागर मे , चूमा उन गहराईयों को , अपनाया उन अंधेरों को

और मणि को पाते ही विलीन हो गये

अजब सी घटना थी ये

 

आज सुबह इक ठंडी हवा के साथ उनकी खुश्बू फिर से आयी

ओर धीरे से बोली की सफ़ेद पन्नों में कुछ राज़ छिपे हैं

जो सिर्फ डूबने से मिलते हैं , स्याही तो सिर्फ उलझाने का काम करती है

क्योंकि तस्वीरें तो रंग बदलतीं हैं

हाँ, हर वक़्त, बस रंग बदलतीं हैं

 

धड़कते दिलों की एक किताब

पन्ने तो सफ़ेद थे पर स्याही लाल थी


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Anthology

मैंने देखा मौन का साम्राज्य

Poetry by Omendra Ratnu

वाणी के जगत के समानांतर, धारण किये उसे भी , किन्तु अस्पर्शित, अभेद्य , अप्रभावित, स्थापित एक वर्तुल में ,स्वयं में लीन विस्तीर्ण और अविभाज्य ! मैंने देखा मौन का साम्राज्य , वाणी के भरता घाव स्थायित्व से , गर्भवती स्त्री सा , स्वयं से ठीक विपरीत को पोषण दे , पूरी सहिष्णुता से, बिन राजा , बिन प्रजा , ये कैसा राज्य ! मैंने देखा मौन का साम्राज्य … भासता निष्टुर , किन्तु है करुणामय , बैठा अनमना सा, ढोता ब्रह्माण्ड को सहज ही , निश्चिन्त उपवास में रत , देता प्रवेश निस्पंद , विदा भी, बिन क्रंदन , परम अद्वैत में स्थित, न कुछ ग्राह्य , न त्याज्य ! मैंने देखा मौन का साम्राज्य
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Blues

Poetry by Neha Kothari

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Declension in April

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Lacking an ordained task, I sit in the blue chair facing south, rain on the circular field past Ballyhaine, rifts of blue opened by the wind, a taper of baling...
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